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विधिवत पूजा अर्चना कर अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए मांगी मन्नत…

On: June 7, 2024 5:58 AM
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State TV India सीपत :- / सतीश यादव – वट सावित्री पूजा के अवसर पर उपवास रहकर तकरीबन सैकड़ों महिलाओं ने विधिवत पूजा अर्चना कर अपने सुहाग की लंबी आयु लिए मन्नत मांगी ।इस‌ पावन अवसर पर सीपत नगर व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं. इस दिन महिलाओं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं.श्रीमती ताम्रकार ने स्कंद पुराण के अनुसार, वट सावित्री व्रत की कथा देवी सावित्री के पतिव्रता धर्म के बारे में है,जो देवी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था लेकिन उनकी अल्पायु थी. इस प्रकार एक बार नारद जी ने इसके बारे में देवी सावित्री को बता दिया और उनकी मृत्यु का दिन भी बता दिया.

सावित्री अपने पति के जीवन की रक्षा के लिए व्रत करने लगती हैंपतिव्रता सावित्री के अनुरूप ही, प्रथम अपने सास-ससुर का उचित पूजन करने के साथ ही अन्य विधियों को प्रारंभ करें। वट सावित्री व्रत करने और इस कथा को सुनने से उपवासक के वैवाहिक जीवन या जीवन साथी की आयु पर किसी प्रकार का कोई संकट आया भी हो तो वो टल जाता है। हर सुहागिन महिला अपने सुहाग की रक्षा के लिए ईश्वर से कामना करती है। पति की लंबी आयु की दुआ करने के साथ-साथ वह उसकी तरक्की के लिए कई उपवास भी रखती है। ऐसे में वट सावित्री व्रत का महत्व अधिक बढ़ जाता है। ये उपवास हर सुहागिन महिला के लिए खास होता है। वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिनें पूरे विधि-विधान से पूजा करती है। इस दौरान कुछ महिलाएं निर्जला उपवास भी रखती है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा का खास महत्व है।माना जाता है कि इस वृक्ष की पूजा के बिना व्रत पूरा नहीं होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह उपवास ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत 6 जून, गुरुवार के दिन रखा जा रहा है। इसे वट पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान सत्यवान और सावित्री की कथा सुने बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है।

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