बंसोड़ मोहल्ला खाली कराने निगम की बड़ी कार्रवाई, 86 परिवारों का इमलीभाठा में पुनर्वास शुरू, महिलाओं का विरोध, दिव्यांग बेटे की मां ने लगाई न्याय की गुहार……

बिलासपुर/ शेख़ असलम
बिलासपुर: बिलासपुर नगर निगम ने बुधवार को सरकंडा क्षेत्र स्थित बंसोड़ मोहल्ला में बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्षों से रह रहे परिवारों की झोपड़ियां खाली कराईं। सुबह से ही निगम की टीम भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची और क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की। निगम प्रशासन का दावा है कि यहां रहने वाले सभी पात्र परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराते हुए इमलीभाठा स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों में पुनर्वास किया जा रहा है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बसोर मोहल्ला में करीब 86 परिवार लंबे समय से निवासरत थे। इन सभी को चरणबद्ध तरीके से हटाकर इमलीभाठा में शिफ्ट किया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। मोहल्ले की महिलाओं ने आरोप लगाया कि वे 70 से 80 वर्षों से इसी स्थान पर रह रही हैं, इसके बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

महिलाओं का कहना है कि कुछ झोपड़ियों को तोड़ा जा रहा है, जबकि कुछ को छोड़ दिया गया है। उन्होंने मांग की कि यदि कार्रवाई हो रही है तो सभी पर एक समान हो। इसी बीच, एक पीड़ित महिला की पीड़ा ने सभी को भावुक कर दिया। महिला ने बताया कि उसका बेटा दिव्यांग है और गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। वह चलने-फिरने में असमर्थ है, ऐसे में उनका घर तोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें नया मकान नहीं मिला। महिला ने निगम प्रशासन से तत्काल आवास उपलब्ध कराने की मांग की। मामले पर नगर निगम अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि सभी 86 परिवारों का पुनर्वास तय योजना के तहत किया जा रहा है और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। अधिकारियों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और अब तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।

निगम ने यह भी बताया कि यह इलाका बरसात में गंभीर जलभराव की समस्या से जूझता है। नाले के संकरे होने के कारण पानी भर जाता है, जिसे अब चौड़ा किया जाएगा। साथ ही क्षेत्र के विकास के लिए यहां गार्डन और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। अब बड़ा सवाल यह है कि जिन परिवारों को अभी तक आवास नहीं मिला है, उन्हें समय पर घर मिल पाएगा या नहीं। क्या पुनर्वास प्रक्रिया सभी के लिए समान और न्यायपूर्ण होगी, या फिर कुछ परिवार अपने हक के लिए भटकने को मजबूर होंगे इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।


