बंजर जमीन बनी ‘जल बैंक’, बोड़ार में 2 करोड़ लीटर वर्षाजल सहेजने की तैयारी

उद्देश्य कुमार साहू,
‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत सोनहत में अनूठी पहल, मनरेगा से मिला रोजगार और बढ़ेगा भूजल स्तर
कोरिया, 22 अप्रैल 2026
कोरिया जिले में जल संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के तहत सोनहत जनपद की ग्राम पंचायत बोड़ार में 10 एकड़ के बंजर क्षेत्र को जलसंचय के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा योजना के अंतर्गत यहां 1350 कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इस कार्य के माध्यम से न केवल बंजर भूमि का उपयोग सुनिश्चित हुआ है, बल्कि आने वाले समय में 2 करोड़ लीटर से अधिक वर्षाजल को भूमिगत करने की व्यवस्था भी बनाई गई है। निर्माण कार्य में स्थानीय श्रमिकों को लगभग 2000 मानव दिवस का रोजगार भी मिला।
वनांचल क्षेत्र सोनहत में प्रचुर वर्षा को देखते हुए जलसंचय की संभावनाओं को साकार किया जा रहा है। करीब 5 लाख रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में कंटूर ट्रेंच को जिगजैग आकार में बनाया गया है, जिससे वर्षाजल एक-एक संरचना में भरते हुए धीरे-धीरे जमीन में समा सके।
प्रत्येक कंटूर ट्रेंच लगभग 270 सेंटीमीटर लंबा, 70 सेंटीमीटर चौड़ा और 60 सेंटीमीटर गहरा है, जिसमें करीब 1 घनमीटर पानी रुक सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये संरचनाएं बारिश के दौरान कई बार भरती हैं, तो करोड़ों लीटर पानी जमीन के भीतर समाहित हो सकता है।
कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने कहा कि ‘पानी की हर बूंद को सहेजना जरूरी है, ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।’ वहीं, जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने इसे भूजल संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर बताया।
निश्चित ही बोड़ार में किया गया यह प्रयास जल संरक्षण का उदाहरण है।ग्रामीण विकास और जनभागीदारी का सफल मॉडल भी बनकर उभर रहा है।



